🔥 “एमपी का अनोखा कारनामा : अजब भी, ग़जब भी—40 करोड़ की इमारत में मीटिंग हॉल गायब!”
🔥 “40 करोड़ की इमारत में मीटिंग हॉल गायब! MP की इंजीनियरिंग फिर चकराई – आख़िर नशे में हैं काम या पैसे में?”

लगभग ₹40 करोड़ की बिल्डिंग में ‘मीटिंग हॉल’ गायब ! क्या MP के इंजीनियर ‘नशे’ में काम कर रहे हैं?
मध्य प्रदेश का ‘अनोखा’ कारनामा : लगभग 40 करोड़ की इमारत, पर मीटिंग हॉल नहीं!

भोपाल – मध्य प्रदेश में एक बार फिर अजब-गजब इंजीनियरिंग का नमूना सामने आया है! लगभग ₹40 करोड़ की लागत से बनी एक भव्य सरकारी इमारत में मीटिंग हॉल ही बनाना भूल गए। यह चौंकाने वाला खुलासा होने के बाद विपक्ष यानी कांग्रेस ने सरकार और उसके इंजीनियरों पर तीखे सवाल दागे हैं।
कांग्रेस का सीधा वार : ‘नशे’ में हैं सरकार और इंजीनियर?
कांग्रेस ने इस लापरवाही को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और अक्षमता से जोड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि क्या मध्य प्रदेश की सरकार और उसके इंजीनियर ‘नशे’ में काम कर रहे हैं, जो इस तरह की बुनियादी गलतियां बार-बार दोहराई जा रही हैं?
पिछला ‘कारनामा’: विपक्ष ने याद दिलाया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश में 90 डिग्री का बेतुका ब्रिज बनाकर जनता के पैसे की बर्बादी की गई थी।
मौजूदा सवाल: अब लगभग 40 करोड़ की बिल्डिंग में मीटिंग हॉल का गायब होना, सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि योजना, निरीक्षण और निर्माण की पूरी प्रक्रिया पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
आखिरकार मध्य प्रदेश में ही क्यों होते हैं ऐसे ‘चमत्कार’?
जनता पूछ रही है कि लगभग 40 करोड़ की परियोजना में मीटिंग हॉल जैसी सबसे जरूरी सुविधा को कैसे अनदेखा किया जा सकता है? क्या यह सिर्फ इंजीनियरों की गलती है, या इसके पीछे राजनीतिक दबाव और कमीशनखोरी का खेल है?
इस तरह के कारनामे यह दर्शाते हैं कि प्रदेश में टैक्सपेयर्स का पैसा किस तरह से बर्बाद किया जा रहा है। सरकार को तुरंत इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए और दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों, और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह सिर्फ एक इमारत का सवाल नहीं है, यह मध्य प्रदेश की छवि और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा धब्बा है।
क्या सरकार अब इस ‘हॉललेस’ बिल्डिंग को ढहाएगी, या इसे भी ‘अजब-गजब’ की श्रेणी में डालकर भूल जाएगी? देखते हैं, इस पर क्या कार्रवाई होती हैं….!










